हम सभी ने गरीब भिखारियों को दान दिया है। दान करना भी बहुत अच्छी आदत है। लेकिन यकीन मानिए इस कहानी में किसी जरूरतमंद की मदद करने का जो तरीका बताया गया है वह आपके दिल को जरूर छुएगी।

एक आदमी पैदल किसी रास्ते से जा रहा था। उसने देखा कि सामने एक बिजली के खंभे में कागज फंसा हुआ है और उसमें कुछ लिखा हुआ है। उसमे लिखा था कि कल इस रास्ते से गुजरते वक़्त मेरे 100 रुपये कहीं गिर गए। मैं बहुत बूढ़ी हो चुकी हु और मुझे आखो से साफ़ नहीं दिखाई देता, कृपया इस रास्ते पर कहीं भी, अगर किसी को मेरे गिरे हुए 100 रूपये मिलते है तो कृपया करके उसे इस पते तक पहुंचा दे।

नीचे दिए गए पते को पढ़ने के बाद, उस व्यक्ति का मन वहाँ जाने को करने लगा। उस व्यक्ति ने पते को याद किया और वहा की तरफ को निकल पड़ा। वहां जाने के बाद जब उसने आवाज लगाई, तो उसने देखा कि गली के आखिरी हिस्से में एक झोपड़ी है और वहां से एक बूढ़ी औरत लाठी के सहारे बाहर निकल रही है। वह आदमी जानता था कि बूढ़ी औरत वहाँ अकेली रहती है।

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बूढ़ी औरत के आने पर, आदमी ने उसे बताया कि माँ जी मुझे आपके गिरे हुए 100 रूपये का नोट मिला था। यह रहे आपके 100 रुपए।

बूढ़ी औरत उस व्यक्ति की बात सुनकर रोने लगी और बोली, ‘बेटा, कल से अब तक लगभग 20-25 लोग मुझे 100 रुपये दे चुके हैं। बेटा मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता मुझे पढ़ना – लिखना भी नहीं आता। पता नहीं किसने मेरी हालत देखकर मेरी मदद करने के लिए ऐसा किया है।

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उस व्यक्ति के बहुत कहने पर, उस बूढ़ी औरत ने उससे 100 रुपए लिए, लेकिन उस व्यक्ति से विनती करते हुए कहा बेटे जाते समय यह संदेश फाड़कर फेंक देना। न जाने किसने मुझ पर दया करके ऐसा किया है। उस आदमी ने अपना सिर हिलाया और चला गया ।

थोड़ी दूर जाने के बाद, आदमी सोचने लगा कि आखिर उन 20-25 लोगों को जो बूढ़ी औरत के पास आए थे, उनसे भी उस बूढ़ी औरत ने संदेश फाड़ने के लिए कहा होगा, लेकिन किसी ने भी अभी तक इसे फाड़ा नहीं। तो फिर मैं इसे कैसे फाड़ सकता हूं?

उस व्यक्ति के मन में उस व्यक्ति के लिए बहुत ही आदर आ रहा था, जिसने इस तरह से बूढ़ी औरत की सेवा करने का रास्ता खोज लिया। उस व्यक्ति के लिए उसका मन कृतज्ञता से भर गया। फिर क्या था, उस व्यक्ति ने भी खंभे में लगे उस सन्देश को वैसे ही रहने दिया।

दोस्तों, यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारे मन में केवल कर्म करने की इच्छा होनी चाहिए, मदद करने के कई तरीके हैं। अगर हमारे अंदर किसी की मदद करने की इच्छा है, तो हम किसी न किसी रूप में जरूरतमंदों की सेवा कर सकते हैं।

” कर्म तेरे अच्छे है तो किस्मत तेरी दासी है

नियत तेरी अच्छी है तो घर में मथुरा कासी है “

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