हाट कालिका माता मंदिर गंगोलीहाट

ॐ जयंती मंगला काली भद्र काली कृपालिनी

दुर्गा शिवा क्षमाधात्री स्वाहा स्वधा नामोश्तुते

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Hat Kalika Mandir

 

सुदूर देवभूमि उत्तराखंड में स्थित नेसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण क्षेत्र गंगावाली का एक शहर गंगोलीहाट जहा स्थित है कुमाऊ रेजिमेंट कि आराध्य देवी माता महाकाली का प्राचीन मंदिर जिसे हाट कालिका के नाम से भी जाना जाता है | इस शक्ति पीठ के बारे में अनेक कहानिया प्रचलित है | जिसमे से एक कहानी यह है कि देविक काल मे जब माँ ने शुम्भ निशुम्भ और रक्तबीज नामक राक्षसों को मारा और माँ अपने विकराल रूप में आई तो माता ने महाकाल कि भाँती तांडव रूप करना शुरू कर दिया और इस स्थान पर माँ का विकराल रूप स्थापित हो गया |जिस हेतु बाद में आदिगुरू शंकराचार्य ने शक्ति  को कीलित करके उन्हें शांत किया |

हाट कालिका मंदिर गंगोलीहाट अपने आप में किसी स्वर्ग लोक से कम नहीं है | आज भी यहाँ होने वाले चमत्कार भक्तो के मन में  आस्था को दिन प्रतिदिन बड़ा रहे है |

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भक्तो के मन में आस्था है कि आज भी माँ रात्री विश्राम को यहाँ आती है | जिसकी पुष्टि कई समाचार चैनलों ने अपनी रिकॉर्डिंग में की है |

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रात्री को जब पुजारी मंदिर का मुख्य द्वार बंद करते है तो मंदिर के अन्दर माँ का बिस्तर व पानी  इत्यादि रखा जाता है | सुबह द्वार खुलने पर आज भी बिस्तर में सिलवटें होती है जैसे कि कोई बिस्तर में सोया हो |और पानी पिया हुआ होता है |

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वर्षो पूर्व से आज भी यहाँ पर शारदीय व चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि को एक विशाल मेला लगता है|

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यहाँ आने वाले भक्तो हेतु सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है उसके बाद वे किसी भी माध्यम से जैसे कि टैक्सी ,बस इत्यादि से यहाँ पर पहुच सकते है| रात्रि विश्राम हेतु भक्तो के लिए धर्मशाले की भी उचित व्यवस्था है या फिर कुछ ही दूरी पर स्थित गंगोलीहाट बाज़ार में होटल इत्यादि ले सकते है  |

यह सुन्दर आर्टिकल और फोटो हमे ” पवन कुमार पाठक ” जी द्वारा भेजा गया है

 

 

 

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