वैसे तो कैंची धाम नीम करौली बाबा (Kainchi Dham) को उत्तराखंड के साथ साथ विदेशी लोग भी बहुत अच्छे से जानते है बाबा नीम किंरौली महाराज का कैंची धाम आश्रम कुमाऊँ के नैनीताल से 20 किलोमीटर दूर नैनीताल-अल्मोड़ा रोड़ पर समुद्र तल से 1400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ।  क्षिप्रा नाम की छोटी पहाडी नदी के किनारे सन् 1962 में कैंचीश्वाम की स्थापना हुई।
यहां दो घुमावदार मोड़ है जो कि कैंची के आकार के हैं इसलिए इसे कैंचीधाम आश्रम कहते हैं । नीम करौली बाबा को इस आश्रम में आने के बाद ही अन्तस्सष्टीय पहचान मिली। उस समय उनके एक अमरीकी भक्त बाबा राम दास ने एक किताब लिखी जिसमें नीम करौली बाबा का उल्लेख किया गया था।

इसके बाद से “पश्चिमी देशो” से लोग उनके दर्शन तथा आशीर्वाद लेने के लिए आने लगे। कैंची धाम नीम करौली बाबा की तपोे स्थली पर श्रद्धा भाव से की गई पूजा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती । यहां पर मांगी गई मन्नतें पूरी तरह से फलदायी हैँ । ‘बाबा नीम किंरौली महाराज’ महान योगीराज थे जो भगवान हनुमान के परम् भक्त थे। बाबा नीम किंरौली महाराज पर लोगों को बड़ी आस्था है।

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Kainchi Dham Mandir Uttarakhand

यहां न सिर्फ भारतीय बल्कि विदेशी भक्त भी दर्शनों के लिए आते हैं। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा उत्तर प्रदेश के ही एक गांव नीम करौली में कठिन तप करके स्वयं ही नीम करौली बन गए । उनकी अलौकिक शक्तिया पूरे देश में, यहा तक की विश्व में इतनी अधिक चर्चा में आईं कि उनका नाम किसी से अनजान नहीं रहा।

डॉ सम्पूर्णानन्द , उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरुप पाठक, पं. गोविन्द वल्लभ पंत, राष्ट्रपति विवि गिरी , , राज्यपाल व केन्दीय मंत्री रहै के. एम. मुंशी, महाकवि सुमित्रानंदन पन्त , राजा भद्री, , अंग्रेज जनरल , देश के पहले प्रधानमंत्री प. जवाहर लाल नेहरु और भी ऐसे अनेक लोग बाबा के दर्शन के लिए आते रहते थे। बाबा अमीर-गरीब, सभी का समान रुप से पीड़ा का निवारण करते थे। उनके उपदेश लोगों को पतन से उबारते और सत्मार्ग -सत्पथ पर चलाते ।

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हमेशा एक कंबल ओढे रहने वाले बाबा के आर्शीवाद के लिए भारतीयों के साथ साथ विदेशी हस्तियां भी उनके आश्रम पर आती हैं। बाबा के उपलब्ध सभी फोटो कम्बल में हैं और भक्त भी उन्हें कम्बल ही भेंट करते थे। 10 सितम्बर 1 973 में वृन्दावन की पावन भूमि पर नीम करौली बाबा का निधन हो गया लेकिन कैंची धाम आश्रम में अब भी विदेशी आते रहते हैं। बताया जाता है कि सबसे ज्यादा अमेरिकी ही इस आश्रम में आते हैँ । आश्रम पहाडी इलाके में देवदार के पेडों के बीच है ।  यहा पाच देवी -देवताओं के मन्दिर हैं । इनमें हनुमान जी का भी एक मन्दिर है। भत्तों का मानना है कि बाबा खुद हनुमान जी के अवतार थे।

यहा के लिए बहुत सारी प्रसिद्ध सत्य कथाये प्रचलित है जिनमे से एक प्रचलित कथा हम आज आपको बताने जा रहे है ।

” कहा जाता है कि एक बार यहा आयोजित ‘भंडारे में ‘घी’ को कमी पड गई । बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्टर में जल भरकर लाया गया । उसे प्रसाद बनाने के लिए जब उपयोग में लाया गया तो वह जल ‘घी’ में परिवर्तित हो गया । इस चमत्कार से आस्थावान भक्तजन नतमस्तक हो गए ”

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फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के सस्थापक स्टीव जॉब की प्रेरणा का स्थल कैंची धाम ही है। यहा नीम करौली बाबा का कैंची धाम आश्रम इनके अलावा कई सफल लोगों के लिए प्रेरणा श्रोत साबित हुआ । एप्पल की नींव रखने से पहले स्टीव जॉब केची धाम आए थे।  यहीं उनकों कुछ अलग करने की प्रेरणा मिली थी । जिस वक्त फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग फेसबुक को लेकर कुछ तय नहीं कर पा रहे थे तो स्टीव जॉब ने ही उन्हें कैंची धाम जाने की सलाह थी । उंसके बाद मार्क जुकरबर्ग ने यहा की यात्रा की और एक स्पष्ट विजन लेकर वापस लौटे।
फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के सस्थापक स्टीव जॉब के अलावा भारी सख्या में विदेशी साधक नीम करौली महाराज से जुड रहे हैं ।

“जय कैंची धाम नीम करौली बाबा की “

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