शेख चिल्ली ( Shekh Chilli ) हमेशा ही उटपटांग बाते करते रहता था । शेख चिल्ली की माँ हमेशा ही उसकी बेवकूफी भरी बातों से परेशान रहती थी। एक बार की बात है शेखचिल्ली ने अपनी माँ से पूछा कि माँ लोग मरते कैसे हैं?

अब माँ सोचने लगी कि इस बेवक़ूफ़ को कैसे समझाऊ कि लोग मरते कैसे हैं, फिर भी माँ ने कहा कि बस आँखें बंद हो जाती हैं और लोग मर जाते हैं बस।

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शेखचिल्ली (Shekh Chilli) का दिमाग तेज़ घूमने लग गया और सोचने लगा कि उसे भी एक बार मर कर देखना चाहिए। उसने गाँव से  थोड़ा बाहर जाकर एक गड्ढा खोदा और उसमें आँखें बंद करके लेट गया।

आधी रात होने पर उस रास्ते से 2 चोर गुजरे। पहला चोर दुसरे चोर से बोला कि हमारे साथ एक और साथी होता तो कितना बढ़िया होता, एक घर के आगे कि निगरानी करता दूसरा घर के पीछे की और तीसरा आराम से घर के अंदर चोरी करता।

शेखचिल्ली उन सब की बाते गौर से सुन रहा था, और अचानक से बोल पड़ा “अरे भाइयों मैं तो मर चुका हूँ, अगर जिन्दा होता तो तुम्हारी मदद जरूर  करता।” दोनों चोर समझ गए कि यह बेवकूफ़ आदमी है। और हमारी बातो में आ जायेगा ।

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पहला चोर शेखचिल्ली से बोला “भाई जरा इस गड्डे से बाहर आकर हमारी मदद कर दो, थोड़ी देर बाद आकर फिर से मर जाना। मरने की इतनी भी क्या जल्दी है।” वैसे ही शेखचिल्ली को गड्ढे में सोये सोये बहुत भूख और ठंड लगने लगी थी, उसने सोचा कि चलो क्यों ना चोरों की मदद ही कर दी जाए।

तीनों ने मिल कर तय किया की शेखचिल्ली अंदर चोरी करने जाएगा, एक चोर घर के आगे खड़ा रहकर निगरानी रखेगा और दूसरा चोर घर के पीछे निगरानी रखेगा।

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शेखचिल्ली को वैसे ही बहुत तेज़ की भूख लगी थी इसलिए वो चोरी करने के बजाय घर में कुछ खाने पीने की चीजें खोजने
लगा। खोजते खोजते रसोई में शेखचिल्ली को चीनी ,दूध और चावल रखे हुए मिल गए। शेखचिल्ली ने सोचा “अरे वाह! क्यों न खीर बनाकर आराम से खाई जाए” और खीर बनानी भी शुरू कर दी।

रसोई में पहले से ही एक बुढ़िया ठण्ड से सिकुड़ कर सोई हुई थी। और जैसे ही बुढ़िया को चूल्हे से आँच लगनी शुरू हुई तो थोड़ा गर्मी महसूस होने पर सही से खुल कर सोने के लिए उसने अपने हाथ फैला दिए। शेखचिल्ली  ने सोचा कि बुढ़िया खीर मांग रही है।

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शेखचिल्ली बोला – अरे बुढ़िया पहले खीर बनने तो दे इतनी सारी खीर में अकेले थोड़ी न खाऊंगा , शांति रख, तुझे भी खिलाऊंगा।” लेकिन बुढ़िया को जैसे जैसे आग की सेंक लगती रही वो और ज्यादा फ़ैल कर सोने लगी, उसने हाथ और भी ज़्यादा फैला दिए।

शेखचिल्ली को लगा कि यह बुढ़िया खीर खाकर ही मानेगी , और उसने गुस्से में गरम गरम खीर बुढ़िया के हाथ पर
रख दी। गरम खीर हाथ में पड़ते ही बुढ़िया ने दर्द से हल्ला कर दिया और बुढ़िया का हाथ जल गया। चीखती चिल्लाती बुढ़िया एकदम हड़बड़ा कर उठी और  शेखचिल्ली पकड़ा गया।

शेखचिल्ली बोला – “अरे मुझे पकड़ कर क्या करोगे, असली चोर तो बाहर हैं। मुझे तो बहुत तेज़ की भूख लगी थी,तो अपने लिए खीर बना रहा था।” इस तरह शेखचिल्ली ने अपने साथ साथ असली चोरों को भी पकड़वा दिया।

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